भगवद गीता गीता सार इन हिंदी डाउनलोड Full Geeta Saar in Hindi

भगवद गीता गीता सार इन हिंदी डाउनलोड Full Geeta Saar in Hindi PDF Download geeta saar in hindi pdf free download गीता सार इन हिंदी डाउनलोड PDF

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भगवद्गीता को गीतोपनिषद् भी कहा जाता है। यह वैदिक ज्ञान का सार है और वैदिक साहित्य के सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण उपनिषदों में से एक है। निस्सन्देह, भगवद्गीता पर अँग्रेजी भाषा में अनेक भाष्य उपलब्ध हैं, अतएव एक अन्य भाष्य की आवश्यकता के बार में प्रश्न किया जा सकता है। इस प्रस्तुत संस्करण का प्रयोजन इस प्रकार बताया जा सकता है :

हाल ही में एक अमरीकी महिला ने मुझसे भगवद्गीता के एक अँग्रेजी अनुवाद को संस्तुत करने को कहा। निस्सन्देह, अमरीका में भगवद्गीता के अनेक संस्करण उपलब्ध हैं, लेकिन जहाँ तक मैंने देखा है, केवल अमरीका में ही नहीं, अपितु भारत में भी, उनमें से किसी को सच्चे अर्थों में प्रामाणिक नहीं कहा जा सकता, क्योंकि लगभग हर एक संस्करण में भाष्यकार ने भगवद्गीता यथारूप के मर्म का स्पर्श किये बिना अपने निजी मतों को व्यक्त किया है।

भगवद्गीता का मर्म भगवद्गीता में ही व्यक्त किया गया है। यह इस प्रकार है : यदि हमें किसी विशेष औषधि का सेवन करना हो, तो हमें उस के लेबल पर लिखे निर्देशों का पालन करना होता है। हम अपने मनमाने ढंग से या मित्र की सलाह से औषधि नहीं ले सकते।

भगवद गीता गीता सार इन हिंदी

भगवद गीता गीता सार इन हिंदी डाउनलोड Full Geeta Saar in Hindi : भगवद गीता गीता सार पीडीऍफ़ डाउनलोड करने का लिंक सबसे आखिर में सरे किया गया है अब आगे कुछ अंश लिखा हुआ पढ़े

अर्जुन द्वारा युद्ध के दोषों का वर्णन

  • कुल के नाश से कुल के सनातन धर्म नष्ट हो जाते हैं,
  • धर्म नष्ट होने पर सारे कुल को पाप दबा लेता है. (१.४०)
  • हे कृष्ण, पाप के बढ़ जाने से कुल की स्त्रियां दूषित हो जाती हैं; और
  • हे वार्ष्णेय, स्त्रियों के दूषित होने पर वर्णसंकर पैदा होते हैं. (१.४१)
  • वर्णसंकर कुलघातियों को और सारे कुल को नरक में ले जाता है,
  • क्योंकि (वर्णसंकर द्वारा) श्राद्ध और तर्पण न मिलने से पितर भी अपने स्थान से नीचे गिर जाते हैं. (१.४२)
  • इन वर्णसंकर पैदा करने वाले दोषों से कुलघातियों के सनातन कुलधर्म और जातिधर्म नष्ट हो जाते हैं. (१.४३)
  • हे जनार्दन, हमने सुना है कि जिनके कुलधर्म नष्ट हो जाते हैं,
  • उन्हें बहुत समय तक नरक में वास करना होता है. (१.४४)

कठिन समय में सशक्त भी भ्रमित हो जाते हैं

  • यह बड़े शोक की बात है कि हम लोग बड़ा भारी पाप करने का निश्चय कर बैठे हैं
  • तथा राज्य और सुख के लोभ से अपने स्वजनों का नाश करने को तैयार हैं. (१.४५)
  • मेरे लिए अधिक कल्याणकारी होगा यदि शस्त्ररहित और
  • सामना न करने वाले मुझको ये शस्त्रधारी कौरव रण में मार डालें. (१.४६)
  • संजय बोले- ऐसा कहकर शोकाकुल मन वाला अर्जुन रणभूमि में
  • बाणसहित धनुष का त्याग करके रथ के पिछले भाग में बैठ गया. (१.४७)

ॐ तत्सदिति श्रीमद्भगवद्गीतासूपनिषत्सु ब्रह्मविद्यायां योगशास्त्रे

श्रीकृष्णार्जुनसंवादे अर्जुनविषादयोगो नाम प्रथमोऽध्यायः ॥

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