छह गुनाहगार औरतें पीडीऍफ़ 6 Gunahgar Aurtein PDF in Hindi

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औरतों के मुतअल्लिक बयान – छह गुनाहगार औरतें

मेरे काबिले एहतिराम बुजुर्गों हमारी यह मज्लिस दो हिस्सों पर मुस्तमित होती है। एक मर्दों पर और दूसरे औरतों पर क्यों कि औरतें भी इस मजिलस में शिर्कत फरमाया करती हैं और उन के लिए मर्दों से अलग पर्दे के साथ मज्लिस की बातें सुन्ने का इन्तिज़ाम किया जाता है। यही वजह है कि इस मज्लिस में जो बयान होता है वह उमूमन मर्दों और औरतों दोनों से मुतल्लिक होता है।

लेकिन कभी कभी कोई बयान खास तौर पर औरतों की ज़रूरत के लिए मसूस होता है। और कभी कोई बयान सिर्फ मर्दों की ज़रूरत का होता है। बहर हाल आज की मज्लिस में रसूलुल्लाह सल्ल० की एक हदीस बयान करने का इरादा है, जो औरतों से मुतज़ल्लिक है और उन के साथ खास है। अगरचे इस हदीस में जो बातें औरतों से मुझल्लिक बयान की गई है में भी पाई जा सकती हैं। इस लिए अगर किसी मर्द में ये बातें मौजूद हों तो उसका वही हुक्म होगा जो औरतों के लिए इस हदीस में बयान किया गया है। इस लिए यह हदीस औरतों साथ मर्दों के लिए भी मुफीद है।

रसूलुल्लाह सल्ल० का रोना – छह गुनाहगार औरतें

रसूलुल्लाह सल्ल० का रोना – छह गुनाहगार औरतें – यह हदीस बहुत अहम बातों पर मुश्तमिल है, इस हदीस को हाफिज़ शमसुद्दीन ज़हबी रह० ने अपनी मशहूर किताब “अल-कवाइर” में नकल किया है। इस हदीस का खुलासा यह है कि एक बार हज़रत अली रज़ि० और हज़रत फातिमा ज़हरा रज़ि० रसूलुल्लाह सल्ल० से मिलने के लिए आप सल्ल. के घर तशरीफ लाए हज़रत अली रज़ि० फ़रमाते हैं कि

जब हम रसूलुल्लाह सल्ल० की ख़िदमत में हाज़िर हुऐ तो देखा कि रसूलुल्लाह सल्ल० रो रहे हैं। जब मैं ने नबी करीम सल्ल० की यह हालत देखी तो अर्ज़ किया ऐ अल्लाह के रसूल सल्ल. मेरे माँ बाप आप पर कुर्बान हों, आप सल्ल० को किस चीज़ ने रुलाया है? और किस वजह से आप सल्ल. इतना रो रहे हैं।

सल्ल. ने जवाब में फरमाया – छह गुनाहगार औरतें

  • आप सल्ल. ने जवाब में फरमाया “मैं ने मेजूराज की रात में
  • अपनी उम्मत की औरतों को दोज़ल के अन्दर तरह तरह के अज़ाबों में मुब्तला देखा
  • और उन को जो सज़ाब हो रहा था वह इतना शदीद और ख़तरनाक था कि
  • उस अज़ाब के तसन्दुर से मुझे रोना आ रहा है।
  • उम्मत पर रसूलुल्लाह सल्ल० की शफकत सरकारे दो जालम सल्ल० की
  • अपनी उम्मत पर इतनी शफकत है कि हम उस का अन्दाज़ा भी नहीं कर सकते।
  • जैसे एक बहुत ही मेहरवान और करम फरमा माँ जो अपनी औलाद पर जान कुर्बान कर देने वाली हो।
  • अगर वह अपनी औलाद को जैल के अन्दर सख्त किस्म की सज़ाऐं सहते हुए देखे तो
  • यकीनन उस माँ का कलेजा मुंह को आ जायेगा।
  • और उन सजाओं को देख कर वे माँ बाप यकीनन रो पड़ेंगे
  • और रसूलुल्लाह सल्ल० की शफकत और मुहब्बतें तो सारी दुनिया कीं माओं से कहीं ज्यादा बढ़ कर है,
  • इस लिए आप सल्ल. ने फ़रमाया कि मैं ने अपनी उम्मत की औरतों के जब दर्दनाक अज़ाब में मुन्तला पाया,
  • इस की वजह मुझे रोना आ राह है कि मेरी उम्मत की औरतों पर इस तरह का दर्द नाक अज़ाब होगा ।

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इस के बाद रसूलुल्लाह सल्ल० ने इस की बज़ाहत फरमाई कि मैं ने दोज़ल के अन्दर औरतों को किस किस तरह बज़ाब में मुक्तता देखा चुनान्चे आप सल्ल. ने फरमाया :

  • मैं ने एक औरत को देखा कि वह अपने बालों के जरीये दोज़ख के अन्दर लटकी हुई है
  • और उस का दिमाग़ इन्डिया की तरह पक रहा है”।
  • एक तो खुद दोज़ख़ के अन्दर होना बड़ाते खुद कितना दर्दनाक अज़ाब है
  • अल्लाह तज्ञाला हम सब को अपनी पनाह में रखे। आमीन
  • और फिर बालों के जरीये लटकना यह बहुत तकलीफ देने वाली सज़ा है
  • और फिर दिमाग़ का पकना यह तीसरी सज़ा है।

6 Gunahgar Aurtein PDF

  • मैं ने दूसरी औरत को दोज़ल में इस तरह देखा कि वह ज़बान के बल लटकी हुई हैं”।
  • अब आप अन्दाज़ा करें किसी की ज़बान खींच कर और निकाल कर उस के जरीये
  • उस के पूरे जिस्म को लटकाया जाये तो उस में कितनी सख्त तकलीफ है।
  • अगर सिर्फ एक हाथ के ज़रीये भी किसी को लटकाया जाये तो वही उस के लिए मौत से भी बुरा है
  • ज़बान तो बहुत नाजुक चीज़ है।
  • तीसरी औरत को मैंने देखा कि वह छातियों के बल दोज़ख़ में लटकी हुई है”।
  • चोथी – औरत को मैं ने इस तरह देखा कि उस के दोनों पैर सीने से बंधे हुये थे
  • और उस के दोनों हाथ पैशानी से बंधे हुये थे” ।
  • पाँचवी औरत को मैं ने इस हालत में देखा कि उस का चेहरा सुन्दर की तरह है,
  • और बाकी जिस्म गये की तरह है, मगर हकीकत में वह औरत है, और साँप बिच्छू अस को लिपटे हुये हैं” ।
  • छटी औरत को मैं ने इस हालत में देखा कि वह कुत्ते की शकल में है और
  • उस के मुंह के रास्ते से दोज़ल की आग दाखिल हो रही है
  • और पाखाने के रासते से आग निकल रही है और अज़ाब देने वाले फरिश्ते दोज़ख के गुर्ज़ उस को मार रहे हैं”।
  • इस तरहें छ: औरतों को होने वाले अज़ाब की तफसील रसूलुल्लाह सल्ल. ने बयान फरमाई।

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