हजरत मूसा अलैहिस्सलाम का वाकया Hazrat Musa Story in Hindi

हजरत मूसा अलैहिस्सलाम का वाकया पीडीऍफ़ Hazrat Musa Story in Hindi hazrat musa ali salam aur firon ka waqia in urdu HiNDI PDF FREE DOWNLOAD

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मिस्र में बनी इस्राईल की हालत

हज़रत यूसुफ अलैहिस्सलाम के हालात में आप पढ़ चुके हैं कि हज़रत ने अपने पिता हज़रत याकूब अलैहिस्सलाम और अपने सब भाईयों को मुल्क शाम से मिस्र में अपने पास ही बुला लिया था। उस समय मिस्र के निवासी मुशरिक (अनेकेश्वरवादी) थे

यह लोग बहुत से देवताओं की पूजा करते थे उन का सब से बड़ा देवता “आमन रा” था जो सूरज का देवता था यह लोग अपने बादशाहों को देवताओं का अवतार समझते थे उन को यह समझा दिया गया था कि देवता खुद बादशाह की शक्ल में ज़मीन पर उतर आता है इसी लिये उन से बादशाहों की पूजा कराई जाती थी यह अपने बादशाहों को फिरऔन कहते थे जिस का मतलब ही था “सूरज देवता का अवतार“।

हज़रत यूसुफ अलैहिस्सलाम ने अपने ख़ानदान के लोगों को उन मुशरिकों से अलग एक जगह बसाया था। हज़रत याकूब अलैहिस्सलाम को भी इस की फिक्र थी कि कहीं उन की औलाद बुतपरस्तों के साथ मिल कर काफिर न हो जाये।

हजरत मूसा अलैहिस्सलाम

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जिस वक्त हज़रत याकूत अलैहिस्सलाम का आखिर वक्त आया तो उन्हों ने ख़ासतौर से अपने खानदान के लोगों को नसीहत फरमाई कि “देखो मेरे बाद तुम कहीं अपने ईमान को ख़राब न कर लेना और मुश्रिकाना रस्मों को अपना कर न बैठ जाना, आप ने उन सब से वादा लिया कि “वह अल्लाह के दीन पर मज़बूती से जमे रहेंगे”। इस किस्से का ज़िक्र अल्लाह तआला ने कुरआन पाक में इस तरह फरमाया है-

“जून याकूब अलैहिस्सलाम की मौत का वक्त आया तो उन्हों ने अपनी औलाद से कहा मेरे बाद तुम किस की इबादत करोगे? तो उन्हों ने जवाब दिया, हम उस खुदा की इबादत करेंगे जो आप का और आप के दादा इब्राहीम अलैहिस्सलाम, इस्माईल और इसहाक का ख़ुदा है, जिस का कोई शरीक नहीं और हम तो सिर्फ उसी की फ़रमाबरदारी (उपासना) करने वाले हैं”।

(सूरह आयत 133)

हज़रत याकूब अलैहिस्सलाम को “इस्राईल” भी कहते थे इसी लिये आप की नस्ल के लोग “बनी इस्राईल” कहलाये। बनी इस्राईल के बहुत से ख़ानदान मिस्र में रहते वसते रहे, और जब उन की संख्या ज़्यादा हो गई तो यह मिस्र में एक कौम समझे जाने लगे।

हजरत मूसा अलैहिस्सलाम का वाकया

पीडीऍफ़ किताब डाउनलोड करें हजरत मूसा अलैहिस्सलाम का वाकया पीडीऍफ़ Hazrat Musa Story in Hindi अधिक जानकारी के लिए – कुरआन पाक में हज़रत मूसा (अलै.) का ज़िक्र

आगे बढ़ने से पहले एक बात ताज़ा कर लीजिये हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम के बारे में हमें सब से ज़्यादा एतबार के काविल वाकिआत और हालात की जानकारी कुरआन मजीद से होती है।

कुरआन मजीद और किताबों की तरह एक किताब नहीं है। आमतौर पर हर किताब का एक विषय होता है उसी के बारे में वाकिआत और तफसीलात उस में जमा कर दी जाती हैं और विषय के एतबार से उस किताब में अलग-अलग बाब मुकर्रर किये जोते हैं लेकिन कुरआन का अंदाज़ बिल्कुल अलग है।

कुरआन पाक में एतकादी मसाइल, अख़लाकी हिदायात, शरीअत के अहकाम, इस्लाम की दावत, नसीहत, तनकीद, अच्छे और बुरों के अंजाम की तफसील, बुरे अंजाम से डरना, भले कामों के अच्छे बदले का ज़िक्र, तौहीद, आख़िरत और रिसालत की दलीलें, इवरत और नसीहत के लिये तारीख़ी वाकिआत बार-बार बयान हुये हैं

हर बार इसी बात को एक नये अंदाज़ से पेश किया जाता है और इस तरह सुनने वाले पर एक नया असर पड़ता है। कुरआन के इस तरह बयान करने के तरीके की क्या क्या ख़ूबियाँ हैं उन के बयान करने का तो यहाँ मौका नहीं, हाँ कुरआनी किस्सों के बारे में यह बात अच्छी तरह सामने रखिये कि कुरआन में कोई वाकिआ भी किस्सा बयान करने के लिये नहीं लिखा गया है।

कुरआन पाक में हज़रत मूसा (अलै.) का ज़िक्र पीडीऍफ़

  • कुरआन एक दावत की किताब है।
  • अरब में जब हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने
  • इस्लाम की दावत लोगों के सामने पेश की तो आप को और आप के साथियों को
  • इस आंदोलन के मुतलिफ मरहलों में मुखतलिफ हालात का मुकाबला करना पड़ा,
  • उन हालात का मुकाबला कुछ आसान काम न था इस के लिये बड़ी तयारी की जरूरत थी
  • कुरआन पाक इस तयारी का सब से अहम ज़रिया था
  • अल्लाह तआला ने मुख्तलिफ वक्तों में इस्लामी जमाअत के लोगों को ज़रूरी हिदायात दीं
  • उन को साबितकदम रखने के लिये पिछली कौमों के हालात उन के सामने पेश किये
  • और इस बात को उस के दिल में उतार दिया कि हक और बातिल की लड़ाई का अंदाज़
  • हमेशा कुछ एक सा ही रहा है, और हर ज़माने में इस्लामी मिशन के तहेत काम करने वालों क
  • कुछ एक से ही हालात कुरआन पाक में हज़रत मूसा (अलै.) का ज़िक्रका सामना करना पड़ रहा है
  • लेकिन जब यह लोग अपनी सीधी और सच्ची राह पर जमे रहे तो
  • आखिरकार बातिल को मैदान से भागना पड़ा साथ ही साथ जिन लोगों को दावत दी जा रही थी

हजरत मूसा अली सलाम की कहानी

  • हजरत मूसा अली सलाम की कहानी –
  • उन्हें बार-बार यह हकीकत याद दिलाई गई कि देखो इस्लाम की
  • जो दावत हज़रत मुहम्मद (सल०) तुम्हारे सामने पेश कर रहे हैं वह कोई अनोखी दावत नहीं है
  • हर ज़माने में अल्लाह के रसूल ने यही इस्लाम पेश किया है
  • जो आज तुम्हारे सामने पेश किया जा रहा है फिर जिन लोगों ने इस दावत की मुखालिफत की
  • उन के बारे में खोल कर बताया गया कि उन की मुखालिफत की किस्म क्या होती है
  • और किस बुनियाद पर वह इस्लामी आंदोलन की मुखालिफत किया करते थे,
  • इन तफसीलात के पेश करने का मकसद यह था कि इस्लामी मिशन के मुखालिफीन
  • इस आईने में अपनी सूरत देख लें और यह बात उन की समझ में आ जाये कि जो रविश
  • उन्हों ने अपना रखी है उस की हकीकत क्या है और उस का अंजाम क्या होने वाला है
  • इन तफ़सीलात को बयान करने में एक तरफ तो मोमिनीन की तसकीन और तसल्ली का सामान किया गया कि
  • वह परेशान न हों उन की मुखालिफत करने वाले अगर सीधी राह पर न आयें तो
  • आख़िरकार उन का अंजाम भी वही होगा जो उन से पहले लोगों का हुआ,
  • दूसरी तरफ उन तफसीलात में मुखालिफों के लिये बड़ी नसीहत का सामान रख दिया गया
  • और उन्हें बता दिया गया कि आगे चल कर उन का अंजाम क्या होने वाला है।

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