ताबीज बनाने की किताब पीडीऍफ़ Dua Taweez Ki Kitab PDF Download

ताबीज बनाने की किताब पीडीऍफ़ Tabij Ki Kitab PDF Download- जिंदगी कब और क्या इंसान से करवाए कोई नहीं जानता है जब किसी के जीवन में किसी तरह की समस्या होती है ऐसे में वह इंसान डॉक्टर के पास जाता है लेकिन जब समस्या स्वास्थ से सम्बंधित न हो तो फिर दरगाह मंदिर और पीर फ़क़ीर के पास जाना पसंद करता है साथ ही दुआ दरूद के साथ ताबीज बनाने के लिए हाफिज ए कुरआन से लेकर मोलाना साहब तक जाना पड़ता है

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अगर आप खुद ही बहुत से समस्याओं का समाधान चाहते है ऐसे में ताबीज बनाने की किताब (Tabij Ki Kitab) पीडीऍफ़ बुक बहुत आपके काम आ सकती है जिस तरह की समस्या हो उसी तरह की ताबीज खुद बनाकर पहने फायदा जरुर होगा ताबीज का काम विश्वास पर होता है

अगर ताबीज पहनते है तो जिस मकसद के लिए पहने है ताबीज उस पर विश्वास भी होना चाहिए कि मेरा यह काम इस ताबीज के पहनने से जरुर हो जाएगा

ताबीज से क्या होता है

ताबीज तो बहुत लोगों को बांधते देखा होगा यह एक तरह का काला धागा हो सकता है या फिर किसी कागज़ के टुकड़े में लिखा हुआ दुआ या मन्त्र होता जो अलग अलग समस्या के लिए अलग अलग दुआ मंत्र से ताबीज बनाया जा सकता है यह गले में पहनने और हाथ में बाँधने के लिए बनाये जाते है

इस्लाम और हिन्दू दोनों धर्म में ताबीज बनाने और पहनने का रिवाज है कोई स्वास्थ से सम्बंधित समस्या से छुटकारा पाने के लिए ताबीज पहनता है तो कोई भुत प्रेत, रूहानी शक्तियों से परेशान होकर ताबीज का इस्तेमाल करता है साथ ही बहुत लोग नजर लगने से बचने के लिए भी इसका इस्तेमाल करते है

जमीन पर ताबीज आया कैसे

इस्लाम के अनुसार ताबीज हजरत नूह अलैहिसलाम के लिए जन्नत से आया मान्यता है कि ताबीज को हजरत नूह अलैहिसलाम ने अपनी कस्ती (नाव) में बाँध दिया और जब दरिया में तूफ़ान आया तो कसती तूफ़ान से बेअसर रही मतलब कसती तूफ़ान से बिना किसी नुक्सान के दरिया से बाहर आ गई हजरत नूह अलैहिसलाम के लिए जन्नत से आये ताबीज पर जो लिखा था उसका तर्जुमा कुछ इस कदर है

हजरत नूह अलैहिसलाम को मिले ताबीज का तर्जुमा –

  • मोहम्मद, अली, तुफाक के बाहा, हसन हुसैन –
  • एक बार जब युसूफ अलैहिसलाम कुआ में गिर गए
  • तो हजरत खिज्र अलैहिसलाम ने उन्हें एक ताबीज दी
  • और इस ताबीज पर भी यही लिखा हुआ था –
  • मोहम्मद, अली, तुफाक के बाहा, हसन हुसैन
  • इमाम जाअफर अलैहिसलाम के जमाने में दूर दूर से लोग आपके पास आते थे
  • और इमाम साहब से चंद कलामत लिखवाकर अपने गले या बाजू में पहनते थे
  • हर वह ताबीज बेहतर है जिसमे अल्लाह का नाम लिखा हो
  • और जहा अल्लाह का नाम है वह से परेशानी और समस्या खुद दूर भागने लगती है
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