तंत्र के दिव्य प्रयोग पीडीऍफ़ Tantra Ke Divya Prayog PDF

तंत्र के दिव्य प्रयोग पीडीऍफ़ Tantra Ke Divya Prayog PDF – किताब तंत्र के दिव्य प्रयोग पीडीऍफ़ डाउनलोड के लिए सबसे आखिर में डाउनलोड पीडीऍफ़ लिंक शेयर किया गया है

- Advertisement -

तंत्र के दिव्य प्रयोग नामक पुस्तक हिंदी भाषा में उपलब्ध है। इस पुस्तक में तंत्र विद्या के विभिन्न प्रयोगों से संबंधित ज्ञान, उपाय, मंत्र और टोटकों के बारे में बताया गया है। यह पुस्तक उन लोगों के लिए उपयोगी हो सकती है जो तंत्र विद्या के बारे में अधिक जानना चाहते हैं।

आप इंटरनेट पर इस पुस्तक की खोज कर सकते हैं और इसे अपनी पसंद के अनुसार खरीद सकते हैं। इस पुस्तक के कुछ ऑनलाइन स्टोर्स निम्नलिखित हैं:

  1. Amazon
  2. Flipkart
  3. Snapdeal
  4. Infibeam
  5. Paytm Mall

इन स्टोर्स में आप इस पुस्तक को आसानी से खरीद सकते हैं और अपने घर तक मंगवा सकते हैं। इसके अलावा, आप अन्य ऑनलाइन पुस्तकालयों जैसे Google Play Books, Kindle और Kobo जैसी सेवाओं का भी उपयोग कर सकते हैं जो आपको ई-पुस्तक के रूप में प्रदान की जाती हैं।

तंत्र के दिव्य प्रयोग

तंत्र विज्ञान

अनन्त जन्मों से एक खोज चलती रही है अपने को पहचानने की, स्वयं को जानने की, क्योंकि स्वयं को जानकर ही उस मूल स्रोत तक पहुंचा जा सकता है, उस स्रोत को ज्ञात किया जा सकता है, जहां से जीवन का अवतरण होता है। जीवन को जानकर ही जीवन से संबंधित उन मूल समस्याओं के कारणों को जाना जा सकता है,

जो हमें पीड़ा, कष्ट पहुंचाते हैं। समय-असमय प्रकट होकर यह समस्यायें नाना प्रकार के दुःख-दर्द देती रहती हैं। जीवन के सत्य को जानकर ही उस शाश्वत एवं दिव्य आनन्द को प्राप्त किया जा सकता है, जिसकी दिव्य अनुभूतियां कभी समाप्त नहीं होती हैं।

और स्वयं को जानने का क्या अभिप्राय है ? जीवीत के गूढ़तम रहस्य को जानना, इस विश्व एवं ब्रह्माण्ड को समझना, प्राकृतिक रहस्यों को आत्मसात करना, यही खोज प्राचीनकाल से आज तक चली आ रही है और यह खोज अनन्तकाल तक इसी प्रकार चलती रहेगी।

  • मनुष्य की इस खोज के अनेक मार्ग रहे हैं।
  • इसका एक मार्ग बाह्य विज्ञान पर आधारित रहा हैं
  • जबकि इसका दूसरा मार्ग आत्मदर्शन और स्वयं के अन्तस में गहराई से प्रवेश करने का रहा है।
  • इन दोनों ही मार्गों की अपनी-अपनी उपयोगिताएं और अपनी-अपनी सीमाएं हैं।
  • वैज्ञानिक मार्ग ने जीवन के अनेक रहस्यों से पर्दा अवश्य उठाया है
  • किन्तु इस मार्ग की सीमाएं केवल वहां तक पहुंचती हैं जहां तक प्रकृति की सीमाएं हैं।
  • प्रकृति की सीमा से परे विज्ञान की पहुंच समाप्त हो जाती है
  • क्योंकि वैज्ञानिकों की खोज, उनकी साधना का माध्यम वही साधन बनते हैं
  • जो स्वयं ही प्रकृति द्वारा निर्मित किये जाते हैं। अतः वैज्ञानिकों की खोज एक सीमा पर जाकर रुक जाती है।

Tantra Ke Divya Prayog PDF Download

This book was brought from archive.org as under a Creative Commons license, or the author or publishing house agrees to publish the book. If you object to the publication of the book, please contact us.for remove book link or other reason. No book is uploaded on This website server. Only We given external Link

Related PDF

LATEST PDF